मंगलवार, 21 मई 2013

तुम तो पैदा ही "उनकी" सेवा करने को हुए हो

एक दिन पहले ही घर गया हुआ था तो माता जी के कहने पर गाँव से निकटम कस्बे में बाजार करने गया था कि चप्पलो ने साथ देने से इंकार कर दिया और एक चप्पल ने खुद को घायल करते हुए ये सन्देश मुझे दे दिया की बिना उसकी मरम्मत के उसका मुझे घर तक पहुंचना असम्भव है। सोचा की चुंगी पर इसकी इसकी सेवा भी करा दी जाये अतः रुक गये चुंगी पर एक मोची चचा के पास। चचा काफी कमजोर और यही कोई 60 की उम्र के रहे होंगे पर गरीबी और अभाव के कारण प्रतीत 70 के होते थे। चचा ने ग्राहको की सेवा के लिए उसी पेड़ के नीचे 2 कुर्सियां भी डाल रखी थी और वक्त यही कोई दोपहर एक बजा होगा। मैने चचा को चप्पल दे दी चाचा ने भी  सही कर दी फटा-फट और मैं वही कुर्सी पर सवारी के इंतजार में बैठ गया। तभी गांव के ही एक भइया यही कोई उम्र होगी 68  साल(हम दोनों की उम्र में लगभग 45 का अन्तर पर भईया ही लगते है वो मालूम नही उनकी पीढ़ी आगे चल रही है या हमारी ) के करीब, भूतपूर्व हैड मास्टर और स्वभाव में बहुत मजाकिया जो हर बात पर चुटकले छोड़ते है , भी अपनी एक  दादा आदम के जमाने की चप्पल  देते चचा को देते हुए बोले कि "इसे भी कर दे यार पैसा आ कर देता हूँ और चले गये"। मोची चचा ने भी कर दी कुछ देर में भइया  आये और चप्पल मांगते हुए बोले की कितना पैसा  हुआ भई?

मोची चचा:- 5 रुपया 
भइया :-अच्छा 

      तभी भइया ने जो चप्पल सही कराई थी उसकी मरम्मत को अपनी पैनी, मास्टर वाली नजर से जांचना शुरु किया वो भी ऐसे की कोई परिपक्क फुट-वियर अभियंता भी न कर पाए। 

भइया :- अरे कर दी तूने SC(अनुसूचित जाती ) वाली बात।

मोची  नही समझ पाया  की भईया ने किस कारण ये बात कही है और न ही मै।

मोची चचा:- क्या हुआ ?
भइया :- देख ये तूने 2 कील ठोकी है बस, वो भी अभी निकलने को तैयार है और पैसे मांग रहा है 5 रुपया।
मोची चचा:-अरे ढंग से तो की है नही उखड़ेगी ये बहुत तजुर्बा है मेरे को।
भइया :- चल जाएगी 2-4 साल?
मोची चचा:-अबे 2-4 तो तेरा और मेरा ही नही पता चलेगा की नही। एक पैर केले के छिलके पर है और एक गड्ढे मे।
भइया :- साले तू पक्का SC है रे।
मोची चचा:-  फालतू मत बोल पैसे दे।
भइया :- पैसे देते हुए साले वैसे हो तुम BPL हो। ( मुझे इसका मतलब समझाते हुए बोले- बेटे BPL मतलब below poorty line ) और कमाई करते को इनकम टेक्स यानी आयकर देने लायक। सरकार को पहले तुम पर  छापा डलवाना चहिये। बताओ साला 1 मिनट के काम के पाँच रुपया और काम  भी घटिया ऐसे तो तू शाम तक 1500 रूपये कमा  लेगा  फिर कैसा BPL हुआ तू। तू तो इनकम टेक्स के दायरे में है साले ।

मोची चचा:-  अबे तो यहाँ झक्क मराने को थोडे ही बैठे है ( मूल शब्द कुछ और थे पर उनका जिक्र यह सही नही)
भइया :- तो साले  इसका मतलब ये थोड़े ही है की तू डिप्टी कलेक्टर या नायब तहसीलदार के बराबर कमाये। वो भी मुफ्त में
मोची चचा:-  अबे तो महंगाई न बढ़ गयी है अब जब सरकारी अफसरों की तनख्वाह बढ़ रही है तो में न बढ़ाऊं  पैसा साले।
भइया :- अरे  साले  अफसर से तुलना कर रहा है अपनी साले  कहाँ वो पवित्र गंगा नदी और कहा ये तेरे पीछे बहता गंदा नाला। साले अफसर तो well qualified  होते है यानि पढ़े लिखे तब उन्हें इतना मिलता है उसमे भी आयकर। और तू कहाँ का जज है 
मोची चचा:-  अबे तू अपना काम कर  चल निकल यहाँ से।
भइया :-साले  अफसरों की क्लास होती है तुम तो बने ही हो उनकी सेवा करने के लिये।

बस अब तक में दोनों की बहस में आनन्द के साथ सुन रहा था क्योकि दोनो  हम उम्र समान तोर पर बरबरी से अपना पक्ष रख रहे थे पर वो जो अंतिम पंक्ति भइया ने कही मुझे बहुत अजीब लगा और मैने वही टोक दिया भइया  ये आप की गलत बात है ऐसा  नही कहना चहिये किसी को भी  की तुम गरीब हो तो इसका मतलब ये नही की अमीरों की सेवा करने को ही पैदा हुए हुए हो।
             भईया  ने मुझे कहा नही ये सच है  मैने कहा नही। हरगिज़  नही 
 उसके बाद भइया  मुझे घूरते हुए चले गये और आँखों-2  में कह गये की घर मिल तेरे बापू से खबर लिवाता हु तेरी कि बडो लोगो  से बहस करने लगा है लडका जब से बाहर पढने गया है।
खैर बापू के पास बात आयी बापू जानते थे की मै गलत नही था  कुछ नही कहा।
           पर सवाल ये है की कब लोग अपनी मानसिकता को बदलेंगे गरीबो के प्रति ऊपर वाले ने तो उन बेचारो को खुद ही  यहाँ  परेशानीयों  का टोकरा सिर पर  रख के भेजा है क्यूँ और हम इन्हें परेशान करते है?
            कोई गरीब है तो इसक मतलब ये नही की उसका धर्म ही हो अमीरों की सेवा करना और उनकी बातें भी सुनना।  नही, उसे भी सम्मान से जीने का हक है अपनी मर्जी  से जी  खा सकता है, कम से कम संविधान ने तो उसे ये हक दिया ही है।  पता नही लोग कब ऐसा शुरु करेंगे?


 

 

 

3 टिप्‍पणियां:

  1. yah lekh me chatra vimarsh namak patrika me bhi aap hi k naam se padh chuka hu.. sabak lene layak ghatna h
    saabhar- virendra singh(aaz tak)

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